भारतीय संविधान की पुस्तक की रोचक बातें

हमारा संविधान

दे सलामी इस तिरंगे को जिससे तेरी शान हैं, सर हमेशा ऊँचा रखना

जब तक दिल में जान हैं |

भारत इस साल ७४वाँ गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है आप सभी को ७४वें  गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ |

गणतंत्र यानी ‘गण’ और ‘तंत्र’ जो देश की जनता को अपनी सरकार चुनने का अधिकार देता है | स्वतन्त्रता दिवस के बाद आज का दिन देश के लिए सबसे महत्वपूर्ण है क्योकि १९५० में इसी दिन, हमारे आजाद भारत ने कानूनी रूप से लोकतंत्र को अपनाया था, अर्थात इस दिन हमारे देश में अपने कानून लागू हुए|

भारतीय संविधान लिखने वाली सभा में कुल 299 सदस्य थे जिसके अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद थे। संविधान सभा ने 26 नवम्बर 1949 में अपना कार्य पूर्ण कर लिया था पर इसे 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया, इसलिए हम हर वर्ष 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते हैं। भारतीय संविधान को पूर्ण रूप से तैयार करने में 2 वर्ष, 11 माह, 18 दिन  का समय लगा था।

आज मैं आपको अपने संविधान के बारे में ऐसी जानकारी देना चाहती हूँ जिसे जानकार आप अपने दाँतो तले उँगली लगा लेंगे|

यह तो सभी जानते हैं कि हमारे देश का संविधान दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान है| अगर यह लिखित संविधान है तो वह पुस्तक भी होगी ही जिसमे यह लिखा गया होगा |

तो यहाँ प्रश्न यह है कि इतना बड़ा सविंधान आखिर लिखा किसने और भारतीय संविधान की वह मूल प्रति है कहाँ ?

तो यह रहा इसका जवाब हमारे संविधान की मूल पुस्तक भारतीय संसद में बनी पुस्तकालय में हीलियम से बने एक बक्से में सहेज कर रखी गई है ताकि वह सुरक्षित रह सके | सबसे आश्चर्य की बात ये है कि विश्व के सबसे बड़े संविधान को टाइपिंग नहीं किया बल्कि इसे ‘प्रेम बिहारी नारायण रायजादा’ ने अपने हाथों से अंग्रेजी में लिखा |

इस काम में उन्हें कुल ६ महीने का समय लगा और ४०० से भी ज्यादा निब का इस्तमाल हुआ जो पेन होल्डर में लगाकर स्याही में डुबो-डुबोकर लिखा गया|

इसको लिखने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री प. जवाहर लाल नेहरू जी ने की| रायजादा ने नेहरु जी की बात मान ली| इतने बड़े संविधान को लिखने के लिए उन्होंने मेहनताने के रूप में एक पैसा भी नहीं लिया बल्कि यह कहा कि इसके बदले में, मैं संविधान के हर पेज पर अपना नाम लिखूँगा और संविधान के आखरी पेज पर अपना नाम अपने दादा के नाम के साथ लिखूँगा | रायजादा की ये इच्छा मान ली गई | रायजादा की कलाकारी की कल्पना इस बात से की जा सकती है कि उन्होंने इतने लम्बे चौड़े सविंधान की प्रति में कही भी कोई भी गलती नहीं की|

देश के ऐसे महान लोगो को शत-शत नमन हैं |

सविंधान की यह पांडुलिपि ४५.७cm x ५८.४ cm पार्चमेंट कागज़ पर लिखी तथा कुल २३३ कागज लगे| इस पाण्डुलिपि का वजन १३ किलोग्राम है|

संविधान की हिंदी प्रति भी मौजूद है जिसको वसंत कृष्ण वैध ने अपने हाथो से लिखा| जिसमे २६६ पेज और १४ किलोग्राम वजन है 

यह दुनिया का एकमात्र संविधान है जिसे चित्रों से सजाया गया है| हमारे संविधान को हाथों से लिखने के साथ-साथ नन्दलाल बोस

के निर्देशन में शांति-निकेतन के कलाकारों ने इसके कवर से लेकर हर पेज को अपनी सुंदर कलाकृति से सजाया है| इनमें मोहनजोदड़ो, वैदिककाल, रामायण, महाभारत के चित्रों के द्वारा प्राचीन भारत दर्शाया गया है तथा नटराजन, गौतम बुद्ध के उपदेश, महावीर का जीवन चरित्र, मौर्य, गुप्त और मुगलकाल के आलावा गाँधी, सुभाष के जीवन का चित्रण भी किया गया है| हमारे संविधान में विशाल हिमालय से लेकर अनंत सागर के सुंदर चित्र भी बनाये गए थे| वास्तव में यह इन चित्रों के द्वारा भरतीय इतिहास और भूगोल का सजीवन चित्रण किया गया| इन चित्रों की शुरुआत होती है भारत के राष्ट्रीय प्रतीक चिह्न अशोक स्तम्भ के शेर से| इसके ऊपर बने चमड़े के कवर पर सोने कि कारीगरी की गई है|  

हमारा गणतंत्र हमारा संविधान है,

भारतीय होने पर हमे अभिमान है |

जय हिन्द!

-किरण यादव

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One response to “भारतीय संविधान की पुस्तक की रोचक बातें”

  1. bahut gyaan prapt hua ye padh kar Kiran ji🙏🏽🙏🏽🙏🏽

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